दशहरा पर कविता – काग़ज़ के रावण मत फूँको

अर्थ हमारे व्यर्थ हो रहे, पापी पुतले अकड़ खड़े हैं काग़ज़ के रावण मत फूँकों, ज़िंदा रावण बहुत पड़े हैं

Read more