Kuch Hakikat Jo Aapke Kam Ke

*”ज़िन्दगी कभी भी ले सकती है करवट…*
*तू गुमान न कर…*

*बुलंदियाँ छू हज़ार, मगर…*
*उसके लिए कोई ‘गुनाह’ न कर.*

*कुछ बेतुके झगड़े*,
*कुछ इस तरह खत्म कर दिए मैंने*
*जहाँ गलती नही भी थी मेरी*,
*फिर भी हाथ जोड़ दिए मैंने*