उलझेंगे नहीं,* *तो सुलझेंगे कैसे

*ये जीवन है…साहब..*
*उलझेंगे नहीं,*
*तो सुलझेंगे कैसे…*
*और बिखरेंगे नहीं,*
*तो निखरेंगे कैसे….*

*”ख़्वाब भले टूटते रहे मगर “हौंसले”*
*फिर भी ज़िंदा हो*

*”हौसला ” अपना ऐसा रखो जहाँ*
*मुश्किलें भी शर्मिंदा हो !!””………*

*सुप्रभात*🙏