कि ने पुछा स्वर्ग कहाँ है बताईए
हम ने कहाँ निरंकारी सत्संग मे चले आईये,
जहाँ शरीर को चंगा रखा जाता है
दिमाग को ठण्डा रखा जाता है
जेब को गरम रखा जाता है
आखों मे शर्म रखी जाती है
जुबान को नरम रखा जाता है दिल मे रहेम , क्रोध पर लगाम, व्यवहार को साफ,होठों पर मुस्कराहट, फिर स्वर्ग मे जाने की क्या जरुरत।
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